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Non-Veg Poems 2: हम हाथों से तो ऐतबार कर ही लेंगे, तू भी हाथों से जादू हज़ार करती जा।

Non-Veg Poems 1 : सोचता हूँ कि वो कितने मासूम थे, हर दफ़ा हाथ सफा हो गए सोचते सोचते।

पुरानी कहावतें 2 : गांड सूख के भई छुआरा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।

Non-Veg Joke 4 : उनकी याद में ऐसा खेल किया, काम न होने पे साहब ने आके पेल दिया।

पुरानी कहावतें 1 : मरने को मूड कर रहो और कफ़न को गांड फट रही

Non-Veg Joke 3 : एक रात सुहानी आई थी, खुआवों की लड़ियाँ लाई थी।

Non-Veg Joke 2 : इश्क़ तो बस जरिया था, उनकी मिल जाये बस यही नज़रिया था।

Non-Veg Joke 1 : अहसान किसी का क्या लेना