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Non-Veg Poems 2: हम हाथों से तो ऐतबार कर ही लेंगे, तू भी हाथों से जादू हज़ार करती जा।

Non-Veg Poems 1 : सोचता हूँ कि वो कितने मासूम थे, हर दफ़ा हाथ सफा हो गए सोचते सोचते।